हम दिवाने हैं

तुम समझते हो हम दिवाने हैं?
हमने दर्द ओ अलम भी जाने हैं,

हम ही ख़ामोश रह गए अक्सर,
तीर ओ खंजर भी सबने ताने हैं,

हमने नींदें हराम कर डालीं
सो हमें ख़ाब फिर हमें बनाने हैं,

हमको ग़म भी महज़ उसूलन ही,
घर की दीवार पर लगाने हैं..

मेरे घर में भी इक असासा है,
वो जो गुज़रे थे सब ज़माने हैं 

मेरे दिल की ये राज़ दारी बची,
अपने अश्कों के कुछ ख़ज़ाने हैं ..
उर्मिला माधव 
ख़ाब फिर से हमें बनाने हैं 

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