जंगली, जंजाल देखो, मकड़ियों के, जाल देखो, आदमी का, हाल देखो, लड़कियों के नाम पर, रोज़ इक वबाल देखो, इज़्ज़तों पे क़ाबिज़ हैं, माईयों के लाल देखो, उफ़ अगर जो करनी है, गर्दनें हलाल देखो, हक़ जो कह रहे हैं उनकी खिंच रही है,खाल देखो, उँगलियाँ उठाने को, ख़ुद-ब-ख़ुद बहाल देखो, जो अलिफ़ न सीख पाए, उनका दाल,ज़ाल देखो, रेप,सीना जोरी की, रोज़ एक मिसाल देखो, देश के खिलाड़ियों को, हाय ख़स्ता हाल देखो जीत आईं ओलिम्पिक, उनका इस्तेमाल देखो, उसके आगे क्या होगा, ये है इक सवाल देखो, कुछ न मिलना,जाना है चेहरों पे मलाल देखो, सोचने का काम क्या है, बस यही हर साल देखो, उर्मिला माधव..