खल सी गई सुनो
ये बात अब तुम्हारी खल सी गई सुनो,
अलफ़ाज़ की कटारी चल सी गई सुनो,
आंसू फ़क़त बने हैं,......ग़ज़लों के वास्ते ?
तबियत ही अब हमारी ढल सी गई सुनो,
लिख्खा है मेरे दिल पै जो तुमने था लिखा
क्या तुम समझ रहे हो टल सी गई,सुनो,
देती रहेगी मुझको, तकलीफ़ उम्र भर
कालिख ही मेरे दिल पै मल सी गई सुनो,
सदियाँ गुज़र गईं हैं मिरे ग़म की शाम को,
लगता है मुझको जैसे कल सी गई सुनो....
#उर्मिलामाधव...
7.8.2015
Comments
Post a Comment