कितनी सदियां गुज़ार दीं मैने

कितनी सदियां गुज़ार दीं मैंने,
अपनी खुशियां भी हार दीं मैंने।।

रु-ब-रु आए वो अदू की तरह,
जिनको खुशियां उधार दीं मैंने।।

दिल पे इक वाक़या गराँ गुज़रा,
ख़्वाहिशें उसपे वार दीं मैंने।।

कोई वादा वफ़ा हुआ न हुआ,
सर से कसमें बुहार दीं मैंने।।

रोते-रोते थकन सी होने लगी,
फिर ये पलकें उतार दीं मैंने।।
उर्मिला माधव...

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