दुहाई दस्तार की
वो के जिनको थी ज़रूरत प्यार की,
क्यों दुहाई दे गए दस्तार की...
तितलियों के रंग दिखला कर हमें,
बस .मिटाते हैं खिजालत हार की,
हम से बढ़कर कौन जाना है उन्हें,
दास्तां क्या है दिले बीमार की.
बस अना के नाम पर ही मिट गए,
दिल में लेकर हसरतें दीदार की.
उर्मिला माधव
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