छंद
अपनी-अपनी बेर को चाहें शिष्टाचार,
वे जो सच्ची बात का,करते हैं प्रतिकार..
करते हैं प्रतिकार समय पर सच ना बोलें,
भारी पलड़ा देख उसी के संग-संग होलें,
आवश्यक है उनको माला उल्टी जपनी,
सुनो-सुनो,मत सुनो कहेंगे,अपनी-अपनी.
उर्मिला माधव,
29th मई 2017..
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