ज़िंदगी का आलम है

बस यही ज़िन्दगी का आलम है,
जब भी देखो तो आँख पुरनम है,

यूँ तो वो दिल में अब भी रहते हैं,
फ़र्क़ इतना है,जुस्तजू कम है,

या हैं अनजान रस्म-ए-उल्फत से,
या नहीं दिल में कोई दम ख़म है,

हाँ मुहब्बत है हमने कह तो।दिया,
दिल में काबा है,आब-ए-जमजम है,

उनके हिम्मत जिगर में है ही नहीं,
फिर तो वो कुछ नही,यही गम है...
#उर्मिलामाधव...
8.5.2015

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