हो न सका

यही तो काम है जो मुझसे ठीक हो न सका,
कोई भी मेरे जिगर के क़रीब हो न सका,

ये दूरियां ही मुझे दूर तक चलाती रहीं,
अजब मक़ाम था हरगिज़ नसीब हो न सका,

मगर मैं फिर भी वहीं, बार-बार चलती रही,
ये हौसला भी गजब था,ग़रीब हो न सका,

हज़ार रंज थे,पुरख़ार मेरी दुनियां थी,
मगर चे दर्द का क़तरा अतीक़ हो न सका,

हज़ार शेर कहे और ग़ज़ल,रुबाई भी,
ज़माना कहता रहा,दिल अदीब हो न सका...
उर्मिला माधव

अतीक़-आज़ाद

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge