ताज कांटों का

ताज कांटों का सजाते रह गए,
लोग हम पर मुस्कराते रह गए,

सब लुटेरे हैं ये हम समझे नहीं,
हम तो अपना घर दिखाते रह गए,

सर पे चढ़के झूट ही चमका बहुत,
हम मगर सच ही बताते रह गए,

ज़िन्दगी दिल तोड़ कर चलती बनी,
हम मुहब्बत ही जताते रह गए,

दिल्लगी परचम लिए, हंसती रही,
 हम हज़ारों ग़म गिनाते रह गए,
उर्मिला माधव

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