रूठ जाते हैं
ऐसा करते हैं,रूठ जाते हैं,
ज़िन्दगी भर को छूट जाते हैं...
कब तलक आपको पुकारें हम,
इतना थकते हैं टूट जाते हैं..
दिल को थामे हैं दोनों हाथों से,
आबले फिर भी फूट जाते हैं..
दिल पे पहले ही से ग़रीबी है,
लोग ..रह रह के लूट जाते हैं,
दिल ने हमको रुलाके तोड़ा है,
इसको हाथों से कूट जाते हैं,
उर्मिला माधव...
30.4.2017
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