नमी न रही
ख़ुश्क आंखों में जब नमी न रही,
ज़िन्दगी फ़िर ये ज़िन्दगी न रही,
जब बड़े हादसों की ज़द में रहे,
ज़ब्त की फ़िर कहीं कमी न रही,
हमको तनहाई ने संभाला बहुत,
तीरगी तुझ से बरहमी न रही,
खिड़कियां धुल गईं जो बारिश में,
गर्द फ़िर देर तक जमी न रही...
उर्मिला माधव,
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