तेरा घर-मेरा घर

बिन दर-ओ-दीवार का घर,उसपै ये दुनियां का डर,
हर तरफ शोलों की बारिश और मेरा तनहा सफ़र,

साथ कोई हो भी गर तो उसके क्या मानी हुए ?
क़ुदरतन ही बंट गये ये मेरा घर ये उसका घर,
उर्मिला माधव

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