देखो झूठी कसम न खाया करो
देखो झूटी कसम न खाया करो,
सच को सच की तरह बताया करो,
गर चे ख़ुद पर यकीं नहीं हो कभी,
सच की क्यूं धज्जियां उड़ाया करो
हम भी हर इक अदा से वाकिफ़ हैं,
कम ही कुछ दून की उड़ाया करो,
हम से इतना उलझना ठीक नहीं
यूँ ही घर की तरफ़ न आया करो,
जैसे गलियों में शोहदों की तरहा,
गर चे मुमकिन है, घूम आया करो
उर्मिला माधव
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