सनम जाना है

सांस को इकदिन थम जाना है,
यही तो सब से कम जाना है,

यहीं रहेंगी महल अटारी,
नहीं ख़ुशी नहीं ग़म जाना है,

कितनी आंख निचोड़ी हमने,
कहां किसी ने नम जाना है 

तू ही सबका सच्चा साँईं,
हमने आज सनम जाना है 
उर्मिला माधव 

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