फ़ितनागर है,हुस्न

फ़ितनागर है,हुस्न तो फिर कीजियेगा क्या जनाब,
लाइए अब ढूंढकर कुछ आप भी इसका जवाब,

हुस्न का अपना चलन है,जो है ला-परवाह खूब,
आप खुद समझें,कहीं हो आप ही कुछ बा-सराब,

हाकिम-ओ-हुक्काम अपनी राह चलते हैं सभी,
हुस्न भी रस्ता चलेगा बे नक़ाब-ओ-बा-नक़ाब, 

लोग दस्तर खान सा,समझा किये हैं हुस्न को,
आप दानिशमंद हैं तो...मत रखें मंशा खराब,

आख़िरश तो हुस्न भी होगा किसी दम बा-जलाल,
क्या समझ पाए कहें सब....बात का लब ए-लुवाब...
उर्मिला माधव 

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