अब नहीं आने के हम

रास्ता बदला है हमने, अब नहीं आने के हम,
पहले जाते थे कहीं, पर अब नहीं जाने के हम..

अब जहां की रौशनी से मुत्मइन हर्गिज़ नहीं,
क्या सबब है ये ज़ुबाँ तक बस नहीं लाने के हम..

कब से गिनती कर रहे हैं ज़िन्दगी की चढ़ उतर,
अब नहीं ख़ाहिश कोई और कुछ नहीं पाने के हम..

अब न कुछ भी फ़र्क़ है, रोने या हंसने का हमें,
झूटी कसमों को बिरादर अब नहीं खाने के हम..

इक करीमी ने तुम्हारी अब तलक ज़िंदा रखा,
तेरे दर को छोड़ कर भी अब नहीं जाने के हम...
उर्मिला माधव

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