ज़रा सी बात थी
ज़रा सी बात थी वो झूठ पर उतर आया,
बला का सच था बड़ी दूर तक नज़र आया,
ज़ुबां को बंद रखा मैंने कुछ कहा ही नहीं,
तो सारी उम्र मिरी ज़ीस्त पर असर आया...
वो एक रंग महज़ जिसकी मुझको आदत थी,
सो मेरे हिस्से वही ग़म का इक सफ़र आया,
वो जिसके टूट के गिरने से डर रहे थे सभी,
कमाल ये कि उसी शाख़ पर समर आया,
उर्मिला माधव
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