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Showing posts from December, 2024

अब नहीं आने के हम

रास्ता बदला है हमने, अब नहीं आने के हम, पहले जाते थे कहीं, पर अब नहीं जाने के हम.. अब जहां की रौशनी से मुत्मइन हर्गिज़ नहीं, क्या सबब है ये ज़ुबाँ तक बस नहीं लाने के हम.. कब से गिनती कर रहे हैं ज़िन्दगी की चढ़ उतर, अब नहीं ख़ाहिश कोई और कुछ नहीं पाने के हम.. अब न कुछ भी फ़र्क़ है, रोने या हंसने का हमें, झूटी कसमों को बिरादर अब नहीं खाने के हम.. इक करीमी ने तुम्हारी अब तलक ज़िंदा रखा, तेरे दर को छोड़ कर भी अब नहीं जाने के हम... उर्मिला माधव

शीशे में बाल आया हुआ

जा नहीं सकता कभी शीशे में बाल आया हुआ, दिल भुला देगा कभी उनका ख़याल आया हुआ :: ja nahin sakta kabhi shishe men baal aaya hua, dil bhula dega kabhi unka khayaal aaya hua, :: जाने किस-किस शक्ल से उठती रही हैं उँगलियाँ, जैसे मेरी सादगी पर .........हो सवाल आया हुआ :: jaane kis-kis shaql men uthti hain dil pe unglian, jaise meri saadgi par ho sawaal aaya hua, :: ग़म शनासी की तलब करती नहीं बेचैन अब, देख लीजे ज़िन्दगी में है कमाल आया हुआ :: gam shansi ki talab karti nahin halkaan ab, Dekh liije zindagi men hai kamaal aaya hua, :: कुछ लकीरों में रहेंगी खामियां तकदीर की, आसमां देखेगा बस दिल पर मलाल आया हुआ :: kuchh lakiron main rahengi khaamiyan taqdiir ki aasman dekhega bas,dil par malaal aaya hua उर्मिला माधव..

रस्साकशी है

ज़िन्दगी मुझको बहुत मंहगी पड़ी है, पर ग़मों की दास्तां पीछे रखी है। कोई भी तन्हाई में जीने कहाँ दे, दह्र में हर रोज़ ही रस्सा कशी है। उर्मिला माधव

जी रहे हैं लोग सब ऊंघे हुए

khwahishon ke rang main doobe huye, jii rahe hain log sab oonghe huye, ab kahan ho,kaise ho,kya haal hai, biit jaayen sadiyan bin poochhe huye, mahfilon main baithte to hain zaroor, muskuraate hoth,dil roothe huye, waah-waah kya baat hai,kya sher hai, daad haazir,lab magar,sookhe huye, aajkal ye hii masheenii taur hai, muskuraaye,chal diye,rookhe huye, फिर नया कोई निशाना दे हमें, ज़िन्दगी ! हम तीर हैं चूके हुए ! ख़ूबसूरत ग़ज़ल Urmila जी.. बहुत ख़ूब !बकुल देव #उर्मिलामाधव... 22.12.2015

सह जाना होता है

कितना सारा ग़म सह जाना होता है, आहें भर कर चुप रह जाना होता है, ख़ामोशी के अपने कई मुनाफ़े हैं, अपने आप से सब कह जाना होता है, कभी किनारे मज़बूती दिखलाते हैं, कभी कभी तो बस बह जाना होता है, उर्मिला माधव 

पुर असर ही नहीं

दिल किसी ग़म से पुर असर ही नहीं, दुनियां वालों का हमको डर ही नहीं, पहरा देते हैं अब ये शम्स-ओ-क़मर, इस ज़माने को ये ख़बर ही नहीं, सब के सब पर भी काट सकते थे, बेबसी उन की हमको पर ही नहीं, अपने लहजे में है कसैला पन, कहने सुनने को कुछ कसर ही नहीं किसकी जुरअत है इसको तड़पा दे, इतना कमज़ोर दिल का घर ही नहीं, उर्मिला माधव 16.12.2017

ज़रा सी बात थी

ज़रा सी बात थी वो झूठ पर उतर आया, बला का सच था बड़ी दूर तक नज़र आया, ज़ुबां को बंद रखा मैंने कुछ कहा ही नहीं, तो सारी उम्र मिरी ज़ीस्त पर असर आया... वो एक रंग महज़ जिसकी मुझको आदत थी, सो मेरे हिस्से वही ग़म का इक सफ़र आया, वो जिसके टूट के गिरने से डर रहे थे सभी, कमाल ये कि उसी शाख़ पर समर आया, उर्मिला माधव 

नहीं कर पाते हैं

हम लोगों से बात नहीं कर पाते हैं, बेमतलब ख़िदमात नहीं कर पाते हैं, सब दुनियां मग़रूर समझती रहती है, ज़ाया हम जज़्बात नहीं कर पाते हैं, भीतर भीतर ज़ख़्म उबलते रहते हैं, गिरया को बरसात नहीं कर पाते हैं, जब कोई तूफ़ान उठाया इस दिल ने, हम आंखों में रात नहीं कर पाते हैं, जब पहले ही बोझ बहुत सा है सर पर, उलझन को इफ़रात नहीं कर पाते हैं... उर्मिला माधव
तेरी दुनिया ने एक कमाल किया, मुझसे बस हर नफ़स सवाल किया, चाहे दिल टूट कर बिखरता रहा, मैंने कब किस से अर्ज़े हाल किया? मुझको मुश्किल हुई संभलने में, मेरी इज़्ज़त को जब ज़वाल किया, हम तो आँखें उठा के देखा किए, जाने कितना न कुछ वबाल किया जब भी आँखें उठा के देख लिया, जाने कितना न कुछ वबाल किया

हैरान हूं हैरान हूं

पंछियों के रूप से,ऑ हर सुबह की धूप से, कोयल की मीठी कूक से,दिल में उठती हूक से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !! दिल में छुपी कटार से दुनियाँ की मीठी मार से, पत्थर पै चढ़ते हार से,हो क़रम की गुहार से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !! चढ़ती हुई बहार से,ढलते हुए ख़ुमार से, वक़्त की रफ़्तार से, बे-वजह ग़ुफ़्तार से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !! दर्द के इज़हार से,कभी बे-वज्ह ही क़रार से, यहाँ ज़ख़्म बे-शुमार से ऑ जिस्म-ए-ज़ार-ज़ार से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !! उफ़ ज़िन्दगी की हार से,ऑ मौत के वक़ार से, लुटती हुई बहार से,सजते हुए मज़ार से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !!.... उर्मिला माधव... 23.9.2014..