log kahte hain
लोग कहते हैं.....भई,नवाजिश है,
ये भी तो एक तरह की साज़िश है,
लफ्ज़ शीरीं जुबां.........शहद जैसी,
दिल के अन्दर अजब सी खारिश है,
जब कभी ये.....उफ़क कहीं रोया,
हंस के कहते हैं लोग.....बारिश है,
हम से मिलना तो साफ़ दिल लेके,
अपनी हर इक से ये..गुजारिश है...
उर्मिला माधव....
8.9.2014...
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