dil dukhata rahega
ख्वाजा मीर दर्द सा'ब की तर्ज़ पर ,ब शुक्रिया---
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अगर इस क़दर दिल दुखाता रहेगा,
यक़ीनन ही बस आता-जाता रहेगा,
तवज्जो को जाने न जाने तगाफ़ुल,
फ़क़त दीदा-ए- तर दिखाता रहेगा
भटकती फ़ज़ाओं की तनहाइयों में
जबीं कोई कब तक झुकाता रहेगा,
अजब खेल देखा ज़माने में दिल का,
जो ठुकरा दे उस पर ही आता रहेगा,
जहां पर कभी कोई इज्ज़त न पायी,
उसी दर पे रह-रह के जाता रहेगा,
उर्मिला माधव ...
8.9.2015
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