चल दफ़ा हो बेबसी
चल दफ़ा हो बेबसी अब रू-ए-बिस्मिल से निकल,
मुझको सुनना कुछ नहीं है बस मेरे दिल से निकल,
तयशुदा है, वक़्त के गिरदाब में घिरना ही है,
इसलिए ख़ुद रास्ता चुन, बच के साहिल से निकल,
सोच मत चढ़ना शुरू कर सीढियां मत कर शुमार
मंज़िलें फिर और भी हैं पहली मंज़िल से निकल,
देख मत हर सम्त मुड़ कर हौसला गिर जाएगा,
छोड़ दामन बेकसी का, ज़ह्न-ए-जाहिल से निकल,
दह्र की मायूसियां चलने न देंगी इक क़दम,
उठ खड़ा हो ज़िंदा हो जा, ग़म के हाइल से निकल,
उर्मिला माधव,
6.9.2018
Comments
Post a Comment