कर पाएगा क्या?
कोई इस्तकबाल भी कर पायेगा क्या ?
चलके दरवाज़े पै कोई आएगा क्या ?
साथ लफ़्ज़ों के हुए हाज़िर यहाँ पर,
कोई मेरे संग कुछ-कुछ गायेगा क्या ?
है तख़इयुल चाँद का पर हूँ ज़मीं पै,
ख़्वाब के संग और कोई जाएगा क्या ?
आईने के नाम पर पत्थर दिखा दे,
इस तरह का ज़ुल्म कोई ढाएगा क्या?
लोग इक दरवीश को जब दें सलामी,
तब कोई हिस्सा तुम्हारा खायेगा क्या?
उर्मिला माधव....
9.9.2014...
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