ग़म नमूदार हुए जाते हैं
ग़म नमूदार हुए जाते हैं,
हम बहुत ख़्वार हुए जाते हैं,
बर्क दुनियां पै गिर गई देखो,
दर भी सब दार हुए जाते हैं,
कांच का घर है तीरगी के तले,
वक़्त की हार हुए जाते हैं,
हाथ को हाथ भी नहीं दिखता,
और क़दम बार हुए जाते हैं,
बस सहारे हैं इन हवाओं के,
जिससे कुछ पार हुए जाते हैं
उर्मिला माधव...
9.9.2017
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