तूल देना मूर्खता है
अपनी इच्छा को निरंतर तूल देना, मूर्खता है
और ये इच्छा कहाँ ले जाएगी क्या ये पता है?
व्यर्थ का अभिमान करना, सर्वथा अनुचित ही तो है,
हर किसीका मान रखना ये मनुज की सभ्यता है
आपकी सामर्थ क्या है, आप पर निर्भर है ये सब
व्यक्ति के अनुरूप ही व्यवहार करना दिव्यता है
दिग्भ्रमित हो कर कहीं भी आचरण अनुचित न हो बस,
नीतिसंगत वार्ता ही प्रेम की परिपूर्णता है
उर्मिला माधव
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