bazm se izzat uchhal kr
वो जा चुके हैं बज़्म से,इज्ज़त उछाल कर,
मैंने भी रख दिया है अभी गम संभाल कर,
ख़ुद ही जवाब दूं ये कहाँ फिक्र है मुझे,
हालात इसको लायेंगे बाहर निकाल कर
कारीगरी अजब है मगर वक़्त की जनाब,
कितनों को इसने पी लिया शीशे में ढाल कर,
उर्मिला माधव....
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