घर जाऊंगी
तार दिल के न छेड़ो,बिखर जाऊंगी,
हादसों से थकी हूँ ....मैं मर जाऊंगी,
गो कि जिसने है बख्शी मुहब्बत मुझे
नाम उसके .ये अशआर कर जाऊंगी..
अय मुसव्विर मुझे फिर से तैयार कर,
यूँ मैं आधी,अधूरी .....न घर जाऊंगी,
तुझसे उम्मीद रखती हूं आक़ा बहुत,
तू खरा तो उतर वरना डर जाऊंगी,
ज़िन्दगी,मौत .....यकसां हैं मेरे लिए,
या इधर जाऊंगी ...या उधर जाऊंगी..
उर्मिला माधव..
93.2017
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