अनजान हैं

आपसे अब तक वही पहचान है,
फिर भी आख़िर हम कहाँ हलकान हैं,

हिज्र में हैं और खड़े हैं दश्त में,
लोग कहते हैं कि हम वीरान हैं,

हमको अब आसानियों का साथ है,
सब मगर इस बात से अनजान हैं,
उर्मिला माधव

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