तलातुम में खड़े हैं हम
तलातुम में खड़े हैं हम, हमें गहराई दिखती है,
कहाँ पर बज रही है आपकी शहनाई दिखती है,
गुनहगारी का इक सिक्का, उन्हीं के नाम रख्खा है,
कि जिन मैली निगाहों को फ़क़त रानाई दिखती है,
कभी महफ़िल जमेगी तब ये किस्सा फिर निकालेंगे
हर इक दिल को लगेगा अबके शामत आई दिखती है
हमें जब नींद आती है तो सब कुछ भूल जाते हैं,
कि नीयत होगई है ख़ाब की हरजाई दिखती है.
कभी हंसने को जी चाहा, तो जा कर देख लेते हैं
कहाँ किस-किसने की है हौसला अफ़ज़ाई दिखती है..
#उर्मिलामाधव
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