हम सज़ा की हद में बतलाए गए हैं

हम सज़ा की हद में बतलाये गए हैं , 
और यहाँ तक खींच कर लाये गए हैं ,

किस सजा के मुस्तहक हम होगये हैं, 
जाने क्या-क्या जुर्म बतलाये गए हैं ??

मोहमल इलज़ाम हैं हम मुत्मइन हैं, 
दर हकीक़त हम तो झुठलाये गए हैं,

उफ़ पस-ए-पर्दा रखे गम छिल रहे हैं 
और अदालत में वो दिखलाए गए हैं ,

इससे बढ़कर और क्या मायूस होंगे ,
हर तरह बे-ईमान जतलाये गए हैं ...
उर्मिला माधव...
२९.८.२०१३

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