हकीकत बबा जू समझनी परैगी

हकीकत बबा जू,समझनी परैगी,
मजा की सजा तौ,भुगतनी परैगी,

न बैय्यर की इज्जत है मिसरी कौ ढेला,
जि गोली कुनैनी,गटकनी परैगी,

घड़ी तुमनें बांधी है,सोने की मन भर,
तौ लोहेउ की तुमकूँ पहरनी परैगी,

बो सोने के बिस्तर,ऑ चांदी के तकिया,
न मिलने ऐं, आदत बदलनी परैगी,

जुआँ तेरी डाढ़ी में डोलिंगे बाबा,
जे दाढ़िउ तौ दारी, कतरनी परैगी,

न पहलें उतारौ जे कारौ सौ चश्मा,
तौ चश्मा बिगर, गैल चलनी परैगी,

जे फंदा लहैं कौ, दहैं ते कटैगौ,
जो करनी करी ऐ तौ,भरनी परैगी..
उर्मिला माधव,
26.8.2017

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge