साहिल नहीं हैं
अपनी क़श्ती के कोई साहिल नहीं हैं
फ़िर भी जो दरिया हैं वो हाइल नहीं हैं
हमको हिन्दू या मुसलमां मत कहो जी,
हम किसी भी ज़ात में शामिल नहीं हैं,
नफरतों के बोझ से टूटा है ये दिल,
ये हकीक़त है कि हम जाहिल नहीं हैं,
हमको तन्हाई गवारा उम्र भर की,
हम ज़माने के क़तई क़ाबिल नहीं हैं,
अलविदा है चल ज़माने नाप रस्ता ,
अब तेरी हस्ती पै हम माइल नहीं हैं.....
उर्मिला माधव...
10.8.2014
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