रूह हिंदुस्तान की

दास्तां हम गा रहे हैं ख़ूब ....हिंदुस्तान की,
किसलिए पुर सोज़ है फिर रूह हिंदुस्तान की ,

हर दरीचे पर लिखी हैं दर्द और दुश्वारियां,
ग़म ज़दा क्यूँ हो गई ख़ातून हिंदुस्तान की,

यौमे आज़ादी का दिन है कह रहे हैं मरहबा
कर गई ग़ारत सभी को फूट हिंदुस्तान की,

हिल नहीं सकती कभी बुनियाद इसकी दोस्तों,
पायदारी हो अगर मजबूत हिंदुस्तान की,
उर्मिला माधव,
14.8.2017

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