बात ज़रा सी

है मिरी आंखों की यही ख़ास उदासी,
लोगों को लगा करती है ये बात ज़रा सी,

रहने को हम भी रह रहे हैं, ख़ाके जहां में 
प ज़िन्दगी जो लगती है  दिन रात सज़ा सी
उर्मिला माधव

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