ग़ैर वाजिब हो उनके घर जाएं

जितनी भरनी हों आँखे भर आयें
इतनी ज्यादा कि दरिया कर जायें ,

चाहे मरने जीने पे बात जा पहुंचे ,
गैर मुमकिन है उनके घर जाएँ ,

जितने दावे किये हैं बढ़-बढ़ के ,
आज साबित वो आके कर जाएँ,

हैं परेशान वो अगर मेरी तरहा,
घर से निकले तो बस इधर आयें,

जो मुहब्बत की रहगुज़र मैं हैं ,
उनको वाजिब नहीं कि डर जाएँ... !!
............उर्मिला माधव.............
२३.८.२०१३

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