अना ही अड़ी है जगह जगह

कहते हैं जिसको राह-ए- मुहब्बत कमाल है ,
इस राह पर अना ही अड़ी है जगह-जगह ,

हम उँगलियों पै गिन के बता पायेंगे नहीं,
बिखरी वफ़ा की लाश पड़ी है जगह-जगह ,

हम हैं फकीर दिल से हमें कुछ गिला नहीं ,
इस से भी एक बात बड़ी है जगह-जगह , 

सर को झुकाया ज्यूँही इबादत की शक्ल मैं, 
हरदम खुदा की ज़ात खड़ी है जगह-जगह 
उर्मिला माधव..
१८.८.२०१३

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge