दिल पे दस्तक जो सुबहो शाम दिए जाती हूँ
दिल पै दस्तक जो सुबह शाम दिए जाती हूँ,
तेरी नज़रों का एहतराम किये जाती हूँ,
तेरे सीने में मेरा दिल भी धड़कता है कहीं,
अपनी तक़दीर तेरे नाम किये जाती हूँ,
मुझको आता ही नहीं देख नज़ाक़त का चलन,
प्यार करना है मेरा काम,किये जाती हूँ,
उर्मिला माधव
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