नहीं देखा होगा

मेरी आँखों का समंदर नहीं देखा होगा,
खा कसम तूने ये मंज़र नहीं देखा होगा,

चश्मे पुरनम जो बरसती है तेरे जाने पर,
तूने जाते हए ,मुड़कर नहीं देखा होगा,

ग़ैर से मिलता है ओ खुश भी नज़र आता है,
उसके सीने में छुपा ख़ंजर नहीं देखा होगा,

तुझको कहती हूँ,बरसने पै निरी बारिश भी,
न हुआ सब्ज़ वो बंजर नहीं देखा होगा,

रात दिन मुझको जो हलकान किये रहता है,
मेरे सीने में बवंडर नहीं देखा होगा...
उर्मिला माधव...
11.5.2015..

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