फ़ुर्सतों के साथ ग़ज़ल

तन्हा सफ़र किया है बड़ी कसरतों के साथ,
ख़ुद को शजर किया है बड़ी हिम्मतों के साथ,

मुश्किल बहुत थी ज़िन्दगी, और राह भी न थी,
ग़म ने असर किया है बड़ी फुरसतों के साथ...

कुछ दोस्तों को शुक्र अदा यूं भी कर दिया,
हमको ख़बर किया है बड़ी शिद्दतों के साथ..

बर्बादियों का जश्न मना कर भी ख़ुश रहे,
सब दर गुज़र किया है बड़ी निस्बतों के साथ..

सदियों से अपने ग़म में यूं ही मुब्तिला रहे,
ग़म ही नज़र किया है, नई क़ुरबतों के साथ..
उर्मिला माधव

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