पीछे पड़ी है

आई जो आँखों में आंसू की लड़ी है, 
कितने ही बरसों से मेरे पीछे पड़ी है,

उम्र भर रौशन दिए आलों में रख्खे,
रात काली बा-अदब दर पै खड़ी है,

अपनी जानिब से हंसूं हूं बे-तहाशा,
क्या कहूँ दुनियां रुलाने पै अड़ी है,

सांस है भारी ऑ इस पै टूटता दम,
है यही मुश्किल कि ये मुश्किल बड़ी है,

छूटती दुनियां,बिखरती जिंदगानी, 
बस यही इंसान की नाज़ुक कड़ी है....
उर्मिला माधव...
20.6.2014..

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