उस्तादों ने काम भला कर रख्खा है
राहत इंदौरी जी के एक मिसरे से
इंस्पायर्ड..
दाद लोगों की, गला अपना, ग़ज़ल उस्ताद की
उस्तादों ने काम भला कर रख्खा है,
सबने उनके नाम गला कर रख्खा है।
शायर भी कहलाना छोटी बात नहीं,
रबने सब का काम चला कर रख्खा है।
क़लम चलाना ग़ैर ज़रूरी बात सही,
मौसिक़ी ने बाम पे लाकर रख्खा है।
उर्मिला माधव
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