एक झील ठहरी सी
एक झील
ठहरी सी,गहरी सी,
झांक कर चेहरा न देखो,
डूब जाओगे,
तुमको तैरना नहीं आता,
इसकी सतह बगुलों के लिए है,
शुद्ध और उजले,
निर्मल कोमल,
स्थायित्व है इनमे,
जगह निश्चित है इनकी,
ये तुम्हारी तरह नही
ये मेरे वांछित समय पर
स्वयं आ जाते हैं
मुझे खोजना नहीं पड़ता
मेरा अस्तित्व स्थाई है
पर तुम्हारे चारों तरफ काई है
तुम इन बगुलों की तरह
धवल ह्रदय नहीं,
मन मैला है तुम्हारा,
दुराव रखते हो,
लो मैंने आज स्वतंत्र कर दिया
कोई प्रश्न नहीं
पर इसका मतलब समझते रहना
मुझे अब कुछ नहीं कहना
शुभम...
#उर्मिलामाधव
20.6.2015
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