नहीं जी सकते

हम मुहब्बत के सराबों में नहीं जी सकते,
सच ही कहते हैं, हबाबों में नहीं जी सकते

आप आलिम हैं मुहब्बत के रहें,ख़ूब रहें,
यार,ख़ादिम हैं नवाबों में नहीं जी सकते,

अपने जज़्बात भी चेहरे पै लिखे रहते हैं,
हम वो जुमले हैं किताबों में नहीं जी सकते, 

बात कहते हैं लब-ए- दम भी निभा देते हैं,
झूठ या सच के जवाबों में नहीं जी सकते,

दिल के बदले में दिया दिल ये कोई बात हुई,
पूरे जाहिल हैं हिसाबों में नहीं जी सकते,
उर्मिला माधव

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