क्या करूँ क्या करूँ

ग़म संभलता नहीं क्या करूँ,क्या करूँ,
चाँद ढलता नहीं क्या करूँ,क्या करूँ?

एक नफ़स भी ख़ुशी का न तक़दीर में,
ज़ोर चलता नहीं क्या करूँ,क्या करूँ?

सूरत-ए-हाल किसको दिखाना अबस,
दिन निकलता नहीं,क्या करूँ,क्या करूँ?
#उर्मिलामाधव..
16.6.2015

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