मसकन बनाना है मुझे

रेत पर मसकन बनाना है मुझे,
अपने ख़ाबों को सजाना है मुझे,

तुम न बसने पाओगे इनमें कभी,
क्यूँकि तुमसे दूर जाना है मुझे,

कब कहाँ दरकार है कोई समां,
ख़ुद ब ख़ुद ही मुस्कुराना है मुझे,

हाँ मैं तनहा हूँ मगर ग़ाफ़िल नहीं,
हौसले से चलते जाना है मुझे,

अब मलक कोई न खाए देखना,
इस तरह खिरमन बचाना है मुझे,

दिल के तूफ़ानों का मुझको डर नहीं,
दिल को ही मदफ़न बनाना है मुझे...
 Urmila Madhav.
13.5.2013.

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