ताक़ीद की
जाने किस-किस ने हमें ताकीद की,
क्यूँ नहीं देखी चमक खुर्शीद की ?
जबकि एहसास-ए-रक़ाबत होगया,
किससे तब उम्मीद हो ताईद की ?
सब चमक से ही अगर मंसूब था,
सबसे बेहतर थी चमक नाहीद की,
वक़्त-ए-मुश्किल हो गए महदूद हम,
दिल संभाला,और फ़क़त तौहीद की,
ख़ूबसूरत जिंदगी ..............नैरंग है,
हमने कब इससे कोई उम्मीद की ?
जब तगाफुल का इरादा कर लिया,
कौन करता फ़िक्र ख़ैर-ओ-दीद की ?
उर्मिला माधव...
17.5.2016....
खुर्शीद--- सूरज
ताईद--- हिमायत,
तौहीद---ईश्वर को एक मानना
नहीद---- शुक्र का तारा
नैरंग---माया-तिलिस्म
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