ज़बान रहने दो

बस कि दिल पर निशान रहने दो, थक गए जिस्म जान रहने दो.

मुझको वहशत है इस ज़माने से, अब ये ख़ाली मकान रहने दो..

दिल भी आज़ाद, जिंदगानी भी, अब ये सब इम्तहान रहने दो...

अपना हिस्सा यहां नहीं बाक़ी, अब ये सारा जहान रहने दो...

ये नहीं हो के लोग डर जाएं 
सच के मुंह में ज़ुबान रहने दो 
उर्मिला माधव

- Urmila madhav

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