ज़िंदगी जब कभी थका दे तो....नज़्म
ज़िन्दगी जब कभी थका दे तो,
चल न पाओगे ये बता दे तो,
आह भरने का कोई काम नहीं,
ख़ुद ब ख़ुद ही उठें ऑ चलते रहें,
क़ुदरतन कोई जब जगा दे तो,
राह का एहतराम करते रहें,
ये न सोचें कि कोई साथ नहीं,
साथ देने को कोई हाथ नहीं
धीरे धीरे ही सही, चलते रहें,
गाहे गाहे ब ख़ुद संभलते रहें,
भूल जाएं, किसीने कुछ भी कहा..
सिर्फ़ सोचें कि कोई बात नहीं,
सांस जब तक है, कोई रात नहीं,
धुन्ध कैसी भी हो, सवेरा है,
दह्र में जब तलक बसेरा है...
उर्मिला माधव
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