ज़िंदगी हमारी है

झूठे लफ़्ज़ों से ग़म गुसारी है,
अय अमां ये भी कोई यारी है ,

ख़ास खुन्नस को रंग देते हो,
ऐसा ये ख़ब्त कबसे तारी है?

सिर्फ़ दिल से क़यास करते हो,
ये कमी दम-ब-दम तुम्हारी है,

इसका अहसास ही तो मुश्किल है,
कौन पलड़ा कहाँ पै भारी है,

हमको जीने दो जैसे जीते हैं,
अय मियाँ ज़िन्दगी हमारी है,
#उर्मिलामाधव ...

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