छोटे बड़े बहुत
कुछ हादसे हुए हैं जो छोटे बड़े बहुत,
हम ज़िंदगी के हाथ से छूटे, लड़े बहुत
आंगन के एक पेड़ में पत्ते भी थे कभी,
तूफां का ऐसा ज़ोर था, टूटे झड़े बहुत,
दीवानापन सवार था चलना ही है हमें
सो जो भी थे सहारे वो उल्टे पड़े बहुत
उर्मिलामाधव
कुछ ज़िंदगी के हादसे उल्टे पड़े बहुत
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