इज़्तिराब वाले

रुतबा दिखा रहे हैं,इल्म-ओ-ख़िताब वाले,
हैरत में पड़ गए हैं,इज़्ज़त-ओ-आब वाले,

कितनी मुख़ालफ़त है, आए हुजूम लेकर,
आंखें मिला रहे हैं, ईमान-ओ- ख़ाब वाले,

जज़्बात मांगती है, हर्फ़-ओ-अदब की दुनियां,
गिनती सिखा रहे हैं,कागज़ किताब वाले,

दावा ही कब किया है,फ़नकार हम हैं यारब,
फिर भी सवाल लेकर,आए हिसाब वाले,

सबको है ये तआज्जुब,ज़िंदा हैं हम अभी तक,
तूफां से लड़ सके हैं, बस इज़तराब वाले

बाद-ए-सबा में हर सू कीलें उछल रही हैं,
सूली से कब डरे हैं , ईसा की ताब वाले,
उर्मिला माधव,

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